दतला नदी पुनर्जीवन हेतु प्रयास
मानव जीवन का आधार पानी रहा है जहाँ पानी था मानव बसाहट वही थी | विगत वर्षों में जलवायु परिवर्तन एवं जल के अनियंत्रित दोहन तथा उसके संरक्षण के प्रति उदासीनता के कारण हमारी नदियों एवं जल स्रोतों में पानी नहीं रह गया है प्रक्रतिक वनस्पति प्रभावित हो रही है, पीने के पानी के आभाव में मूक पशु, पक्षी प्राण त्याग रहे हैं | किसानो के मित्र पालतू पशुओं का अस्तित्व संकट में आ चुके है और शीघ्र ही मानव व जीव संकट में आ जायेगा | इसलिए आज और अभी से हमें केवल चिता नही उन्हें संरक्षण के भागीदार बनना होगा |
नर्मदा नदी मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा मानी जाती हे नर्मदा नदी अमरकंटक से निकलकर गुजरात तक सतत बहती रही हे पूरा क्षेत्र आबाद रहा हे विगत के वर्षो में नर्मदा का प्रवाह गर्मी के दिनों में जबलपुर के भेडाघाट में सिमट कर एक नाले के जेसे हो जाता हे इसका कारण यह रहा हे की नर्मदा की सहायक नदियां सूख जाती हे नर्मदा के प्रवाह को बनांये रखने में जबलपुर जिले के कुण्डम से निकलने वाली हिरण नदी बहुत सहायक रही हे इस नदी के तेज बहाव के कारण हिरन के नाम से जानी जाती हे इसकी लम्बाई 136 किलो मीटर हे यह नरसिंहपुर पहुंचकर नर्मदा को पोषित करती हे नर्मदा नदी मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा मानी जाती हे नर्मदा नदी अमरकंटक से निकलकर गुजरात तक सतत बहती रही हे पूरा क्षेत्र आबाद रहा हे विगत के वर्षो में नर्मदा का प्रवाह गर्मी के दिनों में जबलपुर के भेडाघाट में सिमट कर एक नाले के जेसे हो जाता हे इसका कारण यह रहा हे की नर्मदा की सहायक नदियां सूख जाती हे
नर्मदा के प्रवाह को बनांये रखने में जबलपुर जिले के कुण्डम से निकलने वाली हिरण नदी बहुत सहायक रही हे इस नदी के तेज बहाव के कारण हिरन के नाम से जानी जाती हे इसकी लम्बाई 136 किलो मीटर हे यह नरसिंहपुर पहुंचकर नर्मदा को पोषित करती हे
नर्मदा के प्रवाह को बनांये रखने में जबलपुर जिले के कुण्डम से निकलने वाली हिरण नदी बहुत सहायक रही हे इस नदी के तेज बहाव के कारण हिरन के नाम से जानी जाती हे इसकी लम्बाई 136 किलो मीटर हे यह नरसिंहपुर पहुंचकर नर्मदा को पोषित करती हे
अब लगभग चार माहो के लिए पूरी तरह सूख जाती हे इस विषय पर मेरे कुछ जागरूक साथियों ने अध्यन किया और निश्चित किया की क्यों न हम लोग नर्मदा की सहायक हिरण नदी को आम नागरिको के सहयोग से सदा नीरा बनाने के लिए प्रयास करे किन्तु अर्थ के आभाव में 136 पर काम करना मुस्किल लगा और तब तय किया गया की क्यों न हिरण नदी की सहायक छोटी 23 किलोमीटर की दतला नदी जो केवल चार पांच माह में सुख जाती बहुत कम समय ही जीवित रहती थी को सदा नीरा बनाया जाये और उसका भ्रमण कर अध्यन चालू किया
दतला नदी 23 किलो मीटर लम्बी हे जिसकी पुनर्जीवन यात्रा 24 फरवरी 2020 को खमरवनी कुंडम विकासखण्ड के जबलपुर जिले में स्थित खमरवनी का तालाब इसका उद्गम स्थल है से प्रारम्भ होकर महादेवी माता मंदिर के पास दशरमन ढीमरखेडा विकासखंड जिला कटनी में आकर हिरन नदी मे मिलती है दतला नदी हिरन नदी को पोषित करती हे दतला नदी की यात्रा और अध्यन से पता चला की दतला की सहायक सात नाले हे और 86 किलोमीटर को चिन्हित किया जाकर प्रत्येक ग्रामो में जाकर सार्वजानिक स्थानों पर पुरे ग्राम को बुलाकर उनसे चिता व्यक्त कर उनकी सलाह के आधार पर काम करने की योजना बनाई गई